दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन योजना से पात्र दम्पतियों को मिलेगा आर्थिक संबल

कलेक्टर ने राज्य शासन की मंशानुरूप पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के दिए निर्देश

सारंगढ़-बिलाईगढ़ /–  राज्य शासन द्वारा दिव्यांगजनों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित योजनाओं में दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन योजना महत्वपूर्ण है। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने राज्य शासन की मंशानुरूप पात्र दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ दिलाने तथा योजना का ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।
योजना के तहत दम्पति में किसी एक व्यक्ति के दिव्यांग होने पर 30 हजार रुपये तथा दोनों के दिव्यांग होने पर एक लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसका लाभ लेने के लिए दम्पति में से कम से कम एक दिव्यांग व्यक्ति का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार उसकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना आवश्यक है। दम्पति में पुरुष का प्रथम विवाह होना चाहिए। विवाह के समय युवक की आयु 21 से 45 वर्ष तथा युवती की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। विवाह मान्यता प्राप्त सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार अथवा सक्षम न्यायालय द्वारा कानूनी रूप से संपन्न होना आवश्यक है। दम्पति में से कोई भी सदस्य आयकरदाता की श्रेणी में नहीं होना चाहिए।
पात्र दम्पति को निर्धारित प्रपत्र में आवश्यक दस्तावेज एवं प्रमाण पत्रों के साथ विवाह की तिथि से 90 दिवस के भीतर आवेदन प्रस्तुत करना होगा। शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय तथा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत विवाह पंजीयन के लिए अधिकृत हैं। विवाह पंजीयन के लिए आने वाले दिव्यांग दम्पतियों को योजना की जानकारी देकर लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने ग्राम सभाओं सहित मैदानी स्तर पर योजना की जानकारी पहुंचाने और पात्र हितग्राहियों को आवेदन प्रक्रिया में आवश्यक मार्गदर्शन देने कहा है, ताकि जानकारी के अभाव में कोई पात्र दिव्यांगजन योजना के लाभ से वंचित न रहे। योजना की विस्तृत जानकारी समाज कल्याण विभाग के कार्यालय तथा विभागीय वेबसाइट sw.cg.gov.in से प्राप्त की जा सकती है।

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